उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम (Kainchi Dham) में परम पूज्य नीम करोली बाबा (Neem Karoli Baba Maharaj Ji) के दर्शन करने देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। शिप्रा नदी के शांत तट पर स्थित इस दिव्य आश्रम में हनुमान चालीसा का पाठ, प्रातःकालीन काकड़ आरती और संध्या आरती का अनुभव आत्मा को असीम शांति से भर देता है।
बाबा जी के दर्शन और मालपुए का पावन प्रसाद ग्रहण करने के बाद, अधिकांश भक्त और यात्री यह जानना चाहते हैं कि कैंची धाम के आसपास 1 से 2 दिनों में कौन-कौन से बेहतरीन धार्मिक, प्राकृतिक और शांत स्थल देखे जा सकते हैं।
कुमाऊं का यह पूरा क्षेत्र देवभूमि का हृदय स्थल है, जहां प्राचीन मंदिर, शांत झीलें और हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियां आपका स्वागत करती हैं। आइए जानते हैं कैंची धाम आश्रम के 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित 7 सबसे बेहतरीन दर्शनीय स्थलों की पूरी जानकारी:
1. नैनीताल — मां नैना देवी शक्तिपीठ और नैनी झील (दूरी: 18 किमी)
कैंची धाम से दूरी: मात्र 18 किमी (कार/टैक्सी से लगभग 40 मिनट)
क्यों जाएं और क्या है खास?
- मां नैना देवी मंदिर (51 शक्तिपीठ): नैनी झील के उत्तरी किनारे पर स्थित यह मंदिर अत्यंत जाग्रत शक्तिपीठ है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यहां सती के दोनों नयन (आंखें) गिरे थे। बाबा नीम करोली जी के दर्शन के बाद मां भगवती के इस दरबार में मत्था टेकना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- नैनी झील में बोटिंग: देवदार और बांज के पहाड़ों से घिरी शांत नैनी झील में नौकायन (Boating) का आनंद लें।
- माल रोड और तिब्बती बाजार: शाम के समय माल रोड पर टहलें और प्रसिद्ध बाल मिठाई एवं हस्तशिल्प की खरीदारी करें।
- हनुमान गढ़ी (Hanuman Garhi): नैनीताल में तल्लीताल से 3 किमी दूर स्थित यह प्रसिद्ध हनुमान मंदिर स्वयं बाबा नीम करोली जी की तपोस्थली रहा है। यहां से सूर्यास्त (Sunset) का नजारा अद्भुत दिखाई देता है।
2. घोड़ाखाल — गोलू देवता मंदिर 'न्याय के देवता' (दूरी: 12 किमी)
कैंची धाम से दूरी: भवाली होते हुए लगभग 12 किमी (25 मिनट)
क्यों जाएं और क्या है खास?
- लाखों घंटियों का अनूठा धाम: गोलू देवता को कुमाऊं में साक्षात भगवान शिव और न्याय का सर्वोच्च देवता माना जाता है। मान्यता है कि जिन लोगों को कहीं से न्याय नहीं मिलता, वे यहां अर्जी (पत्र) लिखकर टांगते हैं और उनकी मुराद अवश्य पूरी होती है।
- मनोकामना पूर्ति का प्रतीक: मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु यहां पीतल की घंटी बांधते हैं। मंदिर परिसर में टंगी लाखों छोटी-बड़ी घंटियों की ध्वनि वातावरण में अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा भर देती है।
- श्यामखेत चाय बागान (Shyamkhet Tea Garden): मंदिर के ठीक पास हरे-भरे जैविक चाय के बागान हैं, जहां आप कुमाऊंनी ऑर्गेनिक चाय का स्वाद ले सकते हैं।
3. भीमताल — शांत झील और मध्य में स्थित द्वीप (दूरी: 17 किमी)
कैंची धाम से दूरी: 17 किमी (35 मिनट)
क्यों जाएं और क्या है खास?
- नैनीताल से भी विशाल व शांत झील: भीमताल की झील नैनीताल से बड़ी है और यहां भीड़भाड़ काफी कम होती है, जिससे यह परिवार और ध्यान प्रेमियों के लिए आदर्श जगह है।
- झील के बीच स्थित सुंदर आइलैंड (Island Aquarium): झील के बिल्कुल केंद्र में एक छोटा द्वीप है, जहां नौका द्वारा पहुंचा जाता है। इस द्वीप पर एक आकर्षक मछलीघर (Aquarium) और कैफे बना है।
- प्राचीन भीमेश्वर महादेव मंदिर: 17वीं सदी का यह शिव मंदिर महाभारत काल में पांडु पुत्र भीम द्वारा स्थापित शिवलिंग के लिए विख्यात है।
4. मुक्तेश्वर धाम — 350 साल पुराना शिव मंदिर व चौली की जाली (दूरी: 38 किमी)
कैंची धाम से दूरी: लगभग 38 किमी (सवा घंटे की खूबसूरत पहाड़ी ड्राइव)
क्यों जाएं और क्या है खास?
- हिमालय की चोटियों का 180° विहंगम दृश्य: मुक्तेश्वर समुद्र तल से 2,286 मीटर (7,500 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से नंदा देवी, त्रिशूल और पंचाचूली पर्वत श्रृंखलाओं का अकल्पनीय दृश्य दिखता है।
- मुक्तेश्वर महादेव मंदिर: 350 वर्ष से भी अधिक प्राचीन यह मंदिर भगवान शिव का पावन स्थल है, जहां बाबा जी के कई भक्त ध्यान लगाने आते हैं।
- चौली की जाली (Chauli Ki Jali): मंदिर के पीछे स्थित विशाल चट्टान, जहां से पूरी घाटी और सूर्यास्त का रोमांचक दृश्य दिखता है। यहां रॉक क्लाइम्बिंग और जिपलाइनिंग का भी आनंद लिया जा सकता है।
5. सातताल — सात प्राचीन झीलों का अलौकिक संगम (दूरी: 20 किमी)
कैंची धाम से दूरी: 20 किमी (भवाली-भीमताल मार्ग से)
क्यों जाएं और क्या है खास?
- प्रकृति की अनछुई गोद: घने बांज और चीड़ के जंगलों के बीच आपस में जुड़ी 7 मीठे पानी की झीलें (राम ताल, लक्ष्मण ताल, सीता ताल, नल दमयंती ताल आदि)।
- शांत वातावरण और मेडिटेशन: यह स्थान पर्यटकों के शोरगुल से दूर है। अगर आप बाबा जी के दर्शन के बाद प्रकृति के बीच ध्यान और शांति चाहते हैं तो सातताल से बेहतर कोई जगह नहीं।
- पक्षी दर्शन (Bird Watching): सातताल को भारत के सर्वश्रेष्ठ बर्ड वाचिंग स्पॉट्स में गिना जाता है, जहां 500 से अधिक प्रजातियों के रंग-बिरंगे पक्षी पाए जाते हैं।
6. नौकुचियाताल — रहस्यमयी नौ कोनों वाली झील (दूरी: 22 किमी)
कैंची धाम से दूरी: 22 किमी (भीमताल से आगे 4 किमी)
क्यों जाएं और क्या है खास?
- कुमाऊं की सबसे गहरी झील: नौ कोणों वाली यह रहस्यमयी झील अपनी गहराई और क्रिस्टल जैसे साफ पानी के लिए जानी जाती है। लोककथा है कि कोई भी व्यक्ति एक ही नजर में इसके सभी 9 कोने नहीं देख सकता।
- एडवेंचर और कयाकिंग: यहां पैडल बोटिंग, कयाकिंग और पास की पहाड़ियों पर पैराग्लाइडिंग (Paragliding) का रोमांचक अनुभव लिया जा सकता है।
- कमल ताल (Lotus Pond): झील के पास ही सुंदर कमल के फूलों का तालाब है जो फोटोग्राफी के लिए प्रसिद्ध है।
7. रानीखेत — चीड़ के जंगल, झूला देवी मंदिर और गोल्फ ग्राउंड (दूरी: 45 किमी)
कैंची धाम से दूरी: राष्ट्रीय राजमार्ग 109 पर 45 किमी (लगभग 1.5 घंटे)
क्यों जाएं और क्या है खास?
- नीम करोली बाबा जी का संस्मरण: रानीखेत-अल्मोड़ा मार्ग पर ही बाबा जी का पावन ककड़ीघाट आश्रम भी स्थित है। रानीखेत के शांत वातावरण से बाबा जी का गहरा नाता रहा है।
- झूला देवी मंदिर (Jhula Devi Temple): 8वीं शताब्दी का यह मां दुर्गा का सिद्ध मंदिर भक्तों द्वारा बांधी गई अनगिनत घंटियों के लिए प्रसिद्ध है।
- चौबटिया सेब के बागान और एशिया का सबसे ऊंचा गोल्फ मैदान: रानीखेत में मीलों फैले सेब के बाग और उम्दा चीड़ के जंगलों की खुशबू दिल खुश कर देती है।
कैंची धाम यात्रा के लिए उपयोगी टिप्स (Travel Tips):
- रुकने की व्यवस्था: कैंची धाम आश्रम के पास तल्ला निगलाट, भवाली और रामगढ़ में कई अच्छे और स्वच्छ होमस्टे उपलब्ध हैं। मंदिर में सुबह 7:00 बजे की काकड़ आरती में शामिल होने के लिए 1 से 2 किमी के दायरे में ठहरना सबसे सुविधाजनक रहता है।
- स्थानीय भोजन: कुमाऊं यात्रा के दौरान स्थानीय मडुवे की रोटी, भांग की चटनी, कफ्ली और भवाली-अल्मोड़ा की प्रसिद्ध बाल मिठाई का स्वाद लेना न भूलें।
- पहाड़ी ड्राइविंग: शाम ढलने के बाद पहाड़ों में कोहरा हो सकता है, इसलिए दिन के उजाले में सफर पूरा करने का प्रयास करें।
जय बाबा नीब करौरी जी महाराज! जय श्री राम!

